सुनील मित्तल दान करेंगे 7000 करोड़ रूपए, इन छात्र छात्राओं को मिलेगा फायदा

देश के सबसे बड़े उद्योगपतियों में से एक सुनील मित्तल ने हाल ही में 7000 करोड़ का महादान करने की घोषणा की है। बताया जा रहा है कि यह रकम उनके परिवार की संपत्ति का कुल 10% है। सुनील मित्तल ने बताया कि उनके दान करे हुए इस पैसे से यूनिवर्सिटी खुलेगी जहाँ गरिब छात्र छात्राएं पढ़ सकेंगे। महादान की हुई रकम में से कुछ रकम सत्य भारती स्कूल प्रोग्राम के लिए भी दी जाएगी जो की मित्तल परिवार के भारती फाउंडेशन का फ्लैगशिप प्रोग्राम है।

इस दान को सुनील मित्तल द्वारा उठाया गया शिक्षा के क्षेत्र में एक बहुत बड़ा कदम माना जा रहा है। सूत्रों से पता चला है कि सुनील द्वारा खोली जा रही यह यूनिवर्सिटी 100 एकड़ में 1000 करोड़ रूपए से बनेगी। जो की पूरी तरह रेसिडेंशियल यूनिवर्सिटी होगी। इस यूनिवर्सिटी में छात्र छात्रों के रहने से लेकर खाने पीने तक की सभी सुविधाएँ दी जाएँगी। साथ ही यूनिवर्सिटी कैंपस में ही किताबे खरीदने के लिए स्टेशनरी से ले कर हर छोटी मोटि जरुरत की चीजें उपलब्ध कराई जाएँगी।

 

 

इस यूनिवर्सिटी में दाखिले के लिए क्या प्रक्रिया होगी फिलहाल इस बात पर कोई चर्चा नहीं हुई है। एक बार इस विश्वविधयालय की ईमारत बन कर पूरी हो जाए फिर पाठ्यक्रम से लेकर सभी गहन मुद्दों पर चर्चा की जाएगी और इसे छात्र छात्रों के लिए खोल दिया जाएगा।

 

यूनिवर्सिटी का नाम सत्य भारती यूनिवर्सिटी फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी होगा। यूनिवर्सिटी का कंस्ट्रक्शन अगले साल शुरू करने की योजना है और माना जा रहा है की इसमे सत्र 2021 से पढ़ाई होने लगेगी। इस यूनिवर्सिटी में आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, वर्चुअल रियलिटी और इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स जैसी एडवांस टेक्नोलॉजी के साथ इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की पढाई होगी। इसके लिए माइक्रोसॉफ्ट, गूगल और एप्पल जैसी दिग्गज कंपनियों से साझेदारी की जाएगी।

 

 

गौरतलब है की इस तरह का कदम सिर्फ एक ही उद्योगपति द्वारा उठाया जा रहा है। जबकी भारत में एक से एक अमीर व्यक्ति हैं। भारत के शीर्ष 10 अमीर आज इस काबिल हैं की वे खुद ही एक यूनिवर्सिटी गरीबों के लिए खोल सकते हैं। जिनमे उन्हें ना सिर्फ उच्च शिक्षा मिले बल्कि विदेशों से आए फैकल्टी का ज्ञान और बड़ी बड़ी कंपनियों में नौकरी करने का मौका भी मिले। जिससे वे भी आज के ज़माने में कदम से कदम मिला कर अन्य छात्रों के साथ चल पाएं।

अगर देश के हर राज्य में सिर्फ एक यूनिवर्सिटी ऐसा ही खुल जाए तो यकीनन वो दिन दूर नहीं है जब भारत भी एक विकसित देश कहलाएगा जहाँ गरीबी नहीं बल्कि खुशाली होगी। क्युकी आज बढ़ रहे बच्चे ही ना सिर्फ देश का भविष्य लिख सकते हैं बल्कि वे ही अपने घर की गरीबी मिटा सकते हैं।

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